मधुमीत

काश मैं मधुकर बनता
और तुम पंखुड़ी फूलों की
मैं खिलता सावन बनता
और तुम डोर झूलों की

मैं नाचता मयूर बनूं
तुम चंदानी रातों की
मैं रंग बनु रसीला
तुम मेहँदी हाथों की

मैं रोज़ सवेरा बनता
तुम उषा सौगातों की
मैं यौवन बनु तुम्हारा
तुम रवानी आँखों की

जब मैं गिरधारी बनता
तुम बंशी मेरे होठो की
जब मैं संगीत बनूँ
तुम स्तुति गीतों की

तुम बनों स्कून हमारा
तुम ही हरप्रीत बनो
तुम ही जीने के सहारे
तुम ही मधुमीत बनो

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