पिता

पितृ -दिवस पर विशेष

पिता (कविता)

पिता हैं एक वृक्ष ,
छत्र -छाया में जिसकी ,
सुकून पाएं हम।

पिता हैं एक आधार ,
सम्बल पाकर जिनका ,
सुरक्षित रहें हम।

पिता हैं एक शक्ति -पुंज ,
संचरित होकर उनसे ,
बलवान बने हम।

पिता हैं प्रेरणा भी ,
धारण कर उनका मार्ग ,
जीवन को सफल करे हम।

पिता हैं ज्ञान – संस्कार भी ,
आदर्शों पर उनके चलकर ,
मानव कहलाये हम।

पिता हैं हमारे सबसे अच्छे मित्र ,
हमराज़, हमदर्द ,हमराह भी ,
मार्ग -दर्शन पाकर जिनकी ,
संघर्षों से विजय पाएं हम।

पिता की अंगुली पकड़ ही तो ,
हमने चलना सीखा।
पिता की आँखों से ही दुनिया को ,
हमने देखना सीखा।
महसूस कर त्याग -बलिदान उनका ,
क्यों न उनके समक्ष शीश झुकाएं हम।

पिता है तो सब कुछ है ,
जीवन है ,और जीवन का आनंद है।
पिता नहीं तो कुछ भी नहीं।
पिता का मूल्य उनसे पूछो ,
जिनके पिता नहीं.
क्योंकि पिता हैं बच्चों के लिए अनमोल।
दुनिया की कोई दौलत नहीं.
तो क्यों न आज के शुभ दिन ,
अपने पिता को शत-शत नमन करे हम.

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