गजल-सजा ए मौत से बढ़कर

सजा ए मौत से बढकर यहाँ पर है सजा कोई |
मुहब्बत जिस सनम से हो वही हो बेवफा कोई ||

यहाँ क़ानून उल्टा है लुटेरे राज करते है |
दिलो को लूटने वाली कहाती प्रियतमा कोई ||

न जंजीरों से जो बधते वो बंध जाते मुहब्बत से |
मुहब्बत जुर्म है या फिर बनीं है ये दफा कोई ||

भटकते है जो दीवाने मुहब्बत की सजा पाकर |
न रस्ता ढूंढ पांएगे बताये रास्ता कोई ||

मुहब्बत वास्ते जिसने किया मुझसे था याराना |
वही बेदर्द हाकिम बन न रखती वास्ता कोई ||

धधकता है न जाने क्यूँ दिलों में इश्क अंगारा |
न जाने जाने जाँ कोई न माने दिलरुबा कोई ||

किसी मोहताज को शिव ने दिया था दिल मांगने पर |
जला कर दिल किया वापस नहीं है दी दवा कोई ||

आचार्य शिवप्रकाश शिवप्रकाश
९४१२२२४५४८

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