“स्नान गीत”

नहला दो बन्ने को गुलाब जल से,
नहला दो।
केकरे पोखरिया में छिछली बहुत है,
केकरे पोखरिया गहिर पानी,
नहला दो बन्ने को गुलाब जल से॥
बाबा के पोखरिया में छिछली बहुत है,
ससुर पोखरिया गहिर पानी,
नहला दो बन्ने को गुलाब जल से,
नहला दो।
जोड़ा पहिना दो जमा पहिना दो,
पगड़ी पहिना दो गजब ढ़ंग से,
नहला दो बन्ने को गुलाब जल से,
नहला दो।
राई उइछहू जवाइन उइछहू,
मुँह जुठला दो अमत फल से।
नहला दो बन्ने को गुलाब जल से,
नहला दो॥
(यह रस्म बरात विदाई से एक दिन पहले किया जाता है)

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