अजनबी

इस शहर मे,
है लाखो अजनबी ।
न जाने कौन, किस मोड पर मिल जाये,
क्या पता वो अप्नी मन्जिल को और करीब लाये ।

अन्जान जगह,
अन्जान राहे,
बस एक ही लक्श्य,
कि हम अपनी मन्जिल को ढून्ढ पाये ।

गिर पडे अगर,
तो किसी का साथ हो,
दुख या सुख हो,
तो किसी के साथ बान्ट सको ।

हर कोई बुरा नहि होता,
हर किसी मे है कुछ अच्छाईया,
बुराईयो से तोड लो नाता,
तब जाकर अच्छाईयो से जुडेगा रिश्ता ।

वो फरिश्ता हो सकता है,
या हो सकता है दानव,
वो जिन्दगी को रन्गीन बना सक्ता है,
या फिर उसे उजाड कर रख सकता है।

आज्नबीयो पर भरोसा,
नही कर सकते है,
इस दुनिया मे कौन मासूम और कौन फरेब,
इस बात का हमे अन्दाजा नही है ।

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