गंगा माँ का दर्द

गंगा माँ को तुम बचाओ ।
गंगा माँ तुम्हे बचायेगी ।।
अब मत करना माँ का अपमान ।
नही तो माँ फिर से उठा लेगी अपनी कमान ।।
मत डालना गंगा जल मे गंदगी ।
नही तो गंगा जल मे डलजायेगी हमारी जिन्दगी ।।
मत बहाओ गंगा माँ की आँखो मे आंसु ।
नही तो माँ बहा देगी हमारी आँखो मे आँसु ।।
अब गंगा माँ का मत करना अपमान ।
नही तो 16 जून 2013 की तरह हो जाओगे गुमनाम ।।
अब तुम ये मान लो मन मे तुम ठान लो ।
अब मत करना गंगा माँ का अपमान ।।

ये कविता गंगा माँ को समर्पित है, यह कविता 16 जून 2013 की घटना केदारनाथ के उपरर लिखी गई है ।

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