स्वास्थ्य रक्षक कविता – 7

1 बूंदें कुछ तुलसी के रस की, किंचित नमक मिलाय |
तब डालें स्वर-चलित नाक में , बेहोश होश में आय ||

2 मधु-मक्खी गर काट ले, दंश गड़ी रह जाय |
घृत तुलसी सेंधानमक, पीस तुरंत लगाय ||

3 रस लें चम्मच चार प्याज का, जो हो जाय भगंदर |
बुकनी चम्मच दो मिश्री का, झट डालो पेट के अंदर ||

4 जो कफ़ प्रकोप हो जाए, रह-रह के ठुसकी आए |
हल्दी चूरन फ़ांक मार के, दूध गरम पी जाए ||

5 फ़टी एड़ियां ठीक करे, और फ़टने से बचाए |
हल्दी और मलाई का , जो नित लेप लगाए ||

6 बैठकर जो जल पिये, भूख से कम ही खाय |
कामुक चिंतन से दूर रहे,वात-विकार नहिं आय ||

7 बीज शरीफ़ा चूर्ण को, हेयर आइल में मिलाय |
नित्य केश मर्दन करै, जूँ डेंड्रफ़ हट जाय ||