शहरों में

शहरों में
इमारतें
सीना तान खड़ी
चूमती गगन को
रवि को
चाँद को I
गाँव में
कच्ची दीवालें
मिट्टी के ढेर
सूखी घास के
छप्पड़
गली में
मौहल्ले में I
सूमसाम घने
जंगल में
आवाजें जानवरों की
डराती,
रुलाती,
चबूतरे पर बैठे इंसान
फूँकते हुक्का
नादान से
धुआँ
अनगिनत छल्लों में I

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