धूप में

धूप में
खड़े
अनमने
पेड़ बबूल के
नीम के I
झाड़-झकूटे लताएँ
हरी घासें
समेटे हाथों को I
तनिक लहराती
सजाकर
सिर पर नुकीले
तीरों को I
हवाओं के पथ पर
अडिग होकर
मनचले नन्हे पोधे,
दिखाते छाती को
आँखों को
गुस्से से I

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