चलोगे मेरे साथ

आओ इन बादलों का
एक गोला बनाएं
और ताजा घास पर
पैरों से लुड़काएं

बर्फीले पहाड़ों की
एक कुल्फी बनाएं
और एक सांस में
पूरी चट कर जाएँ

उषा का एक दीपक
घर मुंडेर पर जलाये
और सूरज की गोद
बैठ कर खाना बनाएं

इन लम्बे झरनों में
शदियों तक नहाते रहें
और बब्बर शेर संग बैठ
घंटों बतलाते रहें

कभी बनें बदली काली
और कभी ठंडी फुहार
कभी बनेगे इन्द्रधनुष
कभी पेड़ों की कतार

बरसेंगे बरखा बनकर
बने कभी नदी अन्जान
कभी लहराते खेत बने
और कभी ऊँची मचान

गुफाओं को घरोंदा बनाने
और एक दुनिया नई बसाने
करने मस्ती धूमकेतु के साथ
बोलो चलोगे मेरे साथ

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