संतान

छोटे छोटे बच्चे
जो कचरा बीनते है
एक आधी रोटी को
दो दो जने छीनते है

मैल इतना जम गया
कपड़ों और हाथों पर
अब भरोसा नहीं रहा
इन्हें किसी की बातों पर

पेट की आग अब
भुझाऐ भुझती नहीं
नन्ही नन्ही टाँगे
चलने से थकती नहीं

ना कल का पता है
ना वजूद अपने आप का
जब से साया छूट गया है
इनके माँ बाप का

भुखार हो या भूख हो
तन्हा ही रो लेते हैं
घुटनों को गोद समझकर
ये मासूम सो लेते है

कोई देता है गाली
कोई भगाता यहां वहां
ये बेबश अब
जाएँ तो जाएँ कहाँ

ना कोई प्यार जताता है
ना कोई गोद बिठाता है
ना है माँ कोई बहिन
ना लोरी कोई सुनाता है

शिर्फ़ जीना चाहते है
ये बच्चे नादान है
आप और मेरी तरह
भारत की संतान हैं

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