“विकाश पुरुष,शास्त्र सम्मत मोदी”

जागरण नव जुग दिया! मौन रख सब कुछ पिया॥ जैसा वैसा वह काम दिया? बापू पटेल को याद किया॥ बन्देमातरम को सुुनाया? जन मन को खूब भाया॥ अद्भुत वन्दन से मुक्त कराया? विश्व में गुरु परचम लहराया॥

रूप सुन्दर बहुत तुम्हारा।
सुन्दरतम् वाणी सुधा लुटाया॥
अક્ષय उर्जा भरकर लायया।
कण-कण व्याकुल मन को भाया॥
शौर्य गाथा लिखने आया।
देश प्रहरी हिमगिरि ज्यों पाया॥
आशीर्वाद वह मानो आया।
अंध ક્ષિतिज पर गरजते आया॥
उसने दिब्य हृदय जो पाया। कर्म खूब – खूब लिखवाया॥ राजनीति स्वच्छ छवि पाया। धर्म- नगर ડ परचम लहराया॥ हिंदी संसकृति जेहन में पाया। ‘मंगल’ बनारसी बाबू कहलाया॥ शान बान भाषा साहित्य का देश हमारा। दिव्य જ્ઞાन का दिया जलाने वाला आया॥

वर्षों की वह रही तपस्या ‘मंगल’ पाया।
खिंची हुई हैं सरहदें सरहदी जानो आया॥
सेकुलर गैरसेकुलर का जनमत भेद मिटाया।
जानो धरतीपर गाँधी पटेल फिर आया॥
विकाश पुरुष बन कलियुग में गरीबी में जन्म पाया।
——सा ज्यों मोदी काशी को भाया॥
खर्च भयानक आमद सीमित सीना तान परचम लहराया।
दिव्य જ્ઞાन का दिया जलाने वाला जो ‘मंगल’आया॥
अद्भुत वन्धन मुक्त कराने वाला आया? देश को सोने की चिड़िया का मान दिलाने आया॥ बोझिल गंगा माँ को निर्मल मुक्ति कराने आया? छम छमाछम छम बादल बरसाने वाला आया॥ उलट वासियों मत उछालिये हल निकालिये आया? वेठन से बधे लेखन संस्कृत संस्कृति संसकार निखारने आया॥ विविध धर्म भाषा में बढ़कर मेल कराने वाला आया? संध्या थी विश्व ક્ષિतिज पर गरजते विकाश पुरुष आया॥

तन्त्र-मन्त्र साध-साधना राम-रहीम कहने आया।
ठाकुर और विवेकानन्द से आशीश ले काशी में आया॥
सवाल-जवाब पास हो जिसके पुरुष ऐसा भारत ने पाया।
विश्व पटल पर विश्व गुरु बने शांति संदेश सुनाया॥
जन-जन गूजे वन्देमातरम् जनगणमन की गाथा गाया।
प्रगति और शान्ति के पथ चल अत्याचार भगाने आया?
बापू पटेल ज्यों जुगांत पुरुष विकाश मानो धरती पर आया॥

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