तो कुछ बात बने

तुम दूर से देखकर
मुस्कुराओ तो कुछ नहीं
पास आकर खिलखिलाओ
तो कुछ बात बने

ओश तो हर रोज
गिरती है कलियों पर
आकर इसे शबनम बनाओ
तो कुछ बात बने

तुम्हे देखकर तो नज्मे
छापते है शायर बहुत
रूबरू शब्द ना मिल पाएं
तो कुछ बात बने

हर दिल अजीज है
तेरी एक झलक का
मुझसे रोज मिलने आओ
तो कुछ बात बने

गुप्तगू तो लोग करते है
तेरी अदाओं पर
तुम हमें देख मुस्कुराओ
तो कुछ बात बने

तुम्हे तो खाने को
नजरें बहुत सी है
कुछ बनाकर हमें खिलाओ
तो कुछ बात बने

रोज ही टकराते है
अजनबी लोगों से
तुम और करीब आओ
तो कुछ बात बने

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