बाप

बाप की थप्पड़-
दुनियाँ की अँधड़ से बचाती है;
क्योंकि –
उन की थप्पड़ में-
अनुशासन का पाठ है ,
कर्तव्य का ज्ञान है ,
कुल के गौरव का ध्यान है ,
बाप की थप्पड़ –
दुनियाँ की थपेड़ों से बचाती है ;
क्योंकि –
उन की थप्पड़ में,
सही -गलत की पहचान है,
लोक व्यवहार की खान है,
स्वाभिमान की तान है,
बाप की थप्पड़ –
दुनियाँ की थप्पड़ों से बचाती है;
क्योंकि –
उन की थप्पड़ में ,
तपते भविष्य का सूरज है ,
सुनहरे जीवन के सितारे हैं,
दमकती रोशनी का चाँद है ,
सही मायने में
बाप की थप्पड़ –
कच्चे लोहे को
फौलादी इस्पात में
बदलने की प्रक्रिया है।
जब दुनियाँ की ठोकर ,
चकनाचूर कर देती है,
तब
बाप से मिली नन्हीं सी ठोकर;
सारी दुनियाँ को बाँधना सिखाती है।

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  1. rakesh kumar राकेश कुमार 26/05/2014

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