ये रुमाल किसका है

जब सजदे में हों
समुद्र सी दौलतें
तहज़ीबों पर लगाया
ये हिसाब किसका है

शायद ढूंढ लाऊँ
नूरे जहां को मै
पर लार टपकाता
माहताब किसका है

कुर्बानियों की कीमत
तोलकर लगा रहा
दिलों का तराजू लिए
दुकानदार किसका है

पत्थरमिजाज है लोग
इस बस्ती में
आईने दिखाने का
ख्वाब किसका है

कुछ तो मोल होगा
चाहतों का किसी की
तोहफों से भरा ये
हबाब किसका है

अब वो बात नहीं रही
मरहम में भी राकेश
पर मेरे जख्मों पर रखा
ये रुमाल किसका है

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