ये जंगल

घटा घनघोर
नाचे है मोर
और मेंढक
टर्राये भी

कूहू कूहू
करती कोयल
और थोड़ा
शर्माए भी

उषा के संग
सोये ऊल्लु
मुर्गे हमें
जगाये भी

कंठफोड़वा
बड़ा मेहनती
और चिड़िया
चह्चाये भी

खुशी से लगे
बतख तैरने
मकड़ी जाल
बिछाए भी

ये उपवन हैं
बड़े रसीले
अन्धेरा इनका
भाऐ भी

मृग देखो
छलांगे भरते
और शेर
गुरर्राये भी

सुस्ताते घने
बरगद
बहुत झुकी
लताये भी

कीचड अजगर
नाग की बांबी
हरीभरी
घटाऐं भी

पावन बहुत हैं
ये जंगल
डराएं मुझे
पास बुलाएं भी

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