छंद

काम रूप या बेताल छंद

मत प्यार कर ,ओ यार मेरे ,प्यार अब व्यापार |
पैसे कमा ,सबको घुमा अब ,प्रियतमा गद्दार ||
प्रतिमान क्या ,औ ज्ञान क्या है ,सब हुए लाचार ||
है प्रियतमा ,का प्यार बिकता ,यार बोली मार ||

मत्तगयन्द सवैया छंद

प्रीति प्रतीति न रीति रही अब खेलि रहे सब खेल फ़साना |
बात करें दिल की दिलदार उजाडि रहे दिल बाग़ खजाना ||
तोडि मरोडि निचोडि रहे दिल दर्द हुआ न हुआ नहि जाना |
वो शिव कौन मिले तुमको दिल दर्द दिया न दिया दिल दाना ||

दुर्मिल सवैया छंद

कब से हम उनको याद करे नहि याद उन्हें हमरी कुछ भी |
सगरी दुनिया बिसरी हमसे चपला न प्रसन्न हुई फिर भी ||
कितनी मगरूर हुई सुमुखी अब ज्वाल बनी वह थी शशि भी |
चित चारु कटा दिल दर्द फटा तन तेज घटा न सुना सच भी ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी

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