नवग्रह परिचय

सूर्य परिचय

मध्यान्ह बल है सूर्य का स्वामी अयन का जानिए |
है देव पावक शुष्क सात्विक तत्व पावक मानिए ||
हरिवंश क्षेमोपाय है संज्ञा चतुष्पद है सही |
हैं वर्ष बाइस भाग्य के नरलोक सूरज का कही ||

चन्द्र परिचय

अपरान्ह बल है चन्द्रमा का सजल सात्विक देव जल |
चौबीस भाग्योदय वरस है चन्द्रमा ग्रह तत्व जल ||
शिव पूज क्षेमोपाय हो नरलोक शशि का लोक है |
संज्ञा सरीश्रप बल मुहूरत चन्द्र हरता शोक है ||

मंगल परिचय

मध्यान्ह बल है भौम का दिन काल ज्ञान प्रमान है |
हैं देवता स्कन्द इनके तमस चौपद ज्ञान है ||
जप पाठ रुद्री क्षेमकर्ता शुष्क अग्नि समान है |
गृहलोक नागों का मिला सेनाप्रमुख सम्मान है ||

बुध परिचय

हैं विष्णु बुध के देवता सम ज्ञान ऋतु प्रातः बली |
हैं अब्द बत्तिस भाग्य के दे कांस्य हो सब विधि भली ||
युवराज बुध को जानिये ग्रहलोक बुध का स्वर्ग है |
सत्वादि राजस तत्व प्रथ्वी विधुज पंछी वर्ग है ||

गुरु परिचय

गुरु सत्व सम प्रातः बली है इन्द्र गुरु के देवता |
सोलह वरस भाग्योदयी व्रत अमावस्या क्षेमता ||
ग्रह तत्व है आकाश का पश्वादि द्विपद समान है |
मंत्री वृहस्पति नौ ग्रहों में स्वर्ग लोक प्रमान है ||

शुक्र परिचय

अपरान्ह बल है शुक्र का शुष्कादि संज्ञा है सजल |
सत्वादि राजस पक्ष स्वामी है द्विपद ग्रहतत्व जल ||
भाग्योदयी है वर्ष पच्चिश गोकृपा शुभ योग है |
हैं देव देवी नागलोक प्रभाव शुक का भोग है ||

शनि परिचय

शनि काल बल संध्या समय है शुष्क स्वामी वर्ष का |
पश्वादि पंक्षी तत्व वायू वर्ष शुभ छत्तीस का ||
शनि नाग लोक प्रमान है हैं देव ब्रह्मा मानिये |
हो क्षेम मृत्तुन्जय महा न्यायाधिपति शनि जानिये ||

राहु परिचय

संध्या बली है राहु तामस वर्ष पर अधिकार है |
हैं वर्ष भाग्योदय बयालिश शुष्क वायु विचार है ||
है नागलोक प्रमान इनका देवता भी नाग हैं |
हो क्षेम करके दान नाग समान शनि सम भाग है ||

केतु परिचय

हैं राहु केतु समान ग्रह गुण धर्म एक समान हैं |
दोनों सरीश्रप वर्ग के शुष्कादि वर्ष प्रमान हैं ||
है भिन्नता देवादि केतू देव भूतादिक रहे |
ध्वजदान से हो क्षेम अड़तालीस भाग्योदय कहे ||

आचार्य शिवप्रकाश अवस्थी
९४१२२२४५४८

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