मुझसे कुछ खफा-सा हैां

गाॅंव की फिजा में भ्‍ाी देखो जहर घुला-सा हैं
मुस्‍कराता हर शख्‍स पर कुछ जला-सा हैं
होते है सफेद-पोश वस्‍त्र यहाॅं पर जिसके
जरूरी नहीं की मन उसका धुला-सा हैं
हो अगर यहां पर बातें मीठी किसी कि तो
जरूरी नहीं के हर इंसान सखा-सा हैं
जो दिखे चमकता हु‍आ ऊपर से यहां पर
ये जरूरी नहीं की सोना टका-सा हैं
छाई है खामोशी हर तरफ देखो जरा
हर इंसान लगता मुझसे कुछ खफा-सा हैं
अविनाश कुमार

2 Comments

  1. rakesh kumar राकेश कुमार 14/05/2014
    • avinash kumar 14/05/2014

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