मेरा घरवाला

कोरे कागज़ सी मैं
सोचती थी हर रोज
इस काले अँधेरे में
क्या कोई उजाला होगा

इस दोहती नाव का
क्या कोई रखवाला होगा
कोई संमझेगा मुझे
ऐसा कोई दिलवाला होगा

हर ढलती शाम में
कोई बैठेगा मेरे साथ
कोई होगा जो दर्द का
आशिक़ निराला होगा

मेरे कोरे जीवन पर
लिखेगा अपनी कहानी
और इस कहानी को
पूरा करने वाला होगा

आँशु जमाने में हर कहीं है
कोई दोस्त पोंछने वाला होगा
तन्हाई में भी मुस्कुराऊँ मैं
कोई ऐसा रस का प्याला होगा

दामन मेरा थामकर
चलता जाए भवरों में
ऐसा दिलबर दिलदार
क्या मेरा घरवाला होगा

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