जब बेटी

पलकों को बंद करके
नन्ही परी सो जाती है
जाने दूर सपनो में
कही खो जाती है

ठक ठक भरती कदम
होल होल उठाती है
अपने आप में खोई
गुड़ियों से बतलाती है

मुड़कर देखती है
बड़ी माशूमियत से कभी
छोटी सी तितली
टूटे दांत दिखाती है

बड़ी प्यारी हैं बातें उसकी
तोतली जबान भाती है
किसी वीणा सी बज़ती है
जब वो खिलखिलाती है

गूस्सा उसका तीखा है
मिजाज थोड़ा फीका है
ओढ़ती है माँ की चुनरी
और माथे पर टीका है

जिद उसकी हठीली है
लड़की छैलछबीली है
नाजुक सा पंख है वो
गुड़ियाँ रंग रंगीली है

छुपना छुपाना उसका
मन मन मुस्काना उसका
अचानक घबराना उसका
आखें फिर दिखाना उसका

वो एक दीयाबाती है जिससे
जिन्दंगी जगमगाती है
मेरी रूह चैन पाती है
जब बेटी गले लग जाती है

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  1. rohit 19/09/2016

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