फिर भी इंशान

पंछी ये चहकते
क्यूँ हैं
फूल इतने महकते
क्यूँ है

लताएँ ये मदमस्त
क्यूँ है
पहाड़ इतने शख्त
क्यूँ है

झीलों के संग
बहती नौका
मछलियों को
उछलने का मौका

मस्ती करते
स्वान देखो
चुप बैठे
इंसान देखो

उजले से
आसमान देखो
सांवरे से
भगवान देखो

नहलाती है
झम झम बारिश
आती है क्यूँ
कम कम बारिश

लाल क्यूँ है
तोते की चोंच
बिल्ली क्यूँ
लेती है नौच

गिरगिट क्यूँ है
रंग दिखाते
बन्दर क्यूँ है
हमें चिढ़ाते

लोग देखो
खुद से बतलाते
दुनिया देख
पागल हो जाते

घुस्सा करते है
तेरी मेरी पर
करते यकीन
हेराफेरी पर

इस दुनिया में
क्या क्या होता है
फिर भी इंशान
रोता रहता है

4 Comments

  1. Ravi shukla 12/05/2014
    • rakesh kumar rakesh kumar 12/05/2014
  2. Rinki Raut Rinki Raut 13/05/2014
    • rakesh kumar राकेश कुमार 14/05/2014

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