किस्मत

हर एक की किस्मत,
होती है अलग,
किसी को मिल्ती है जन्नत,
तो किसी के जिन्दगी से छूट जाती है दमक.

हर द्म,
ये किस्मत,
को हम दोशी है ठेहराते,
मगर कौन है इस हार के जिम्मेदार, येह हम नही जान पाते.

किस्मत एक ऐसी लकीर है,
जो आज टेडी तो कल सीधी है,
कोई नही जान्ता इस्का खेल,
इस्से हर किसी ने अप्नी डोर बान्धी है.

मेह्नत की कमाई,
व्यर्थ नही जाती,
ये सब जान्ते है,
सिवाये किस्मत के.

पूरी जिन्दगी ह्म,
पसीना बहाकर है काम करते,
क्या पता कि ये किस्मत,
कहाः ले जाती है हमे?

जो सोचो, अच्छा सोचो,
अप्नी किस्मत को दोश मत दो,
ये किस्मत एक जरीया है मन्जिल तक पहुन्चने का,
तो फिर क्यो इसे सताना बेवजाह?

3 Comments

  1. rakesh kumar राकेश कुमार 14/05/2014

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