आदर्श चरित्रवांन

हे नाथ तेरी वंदना
मैं दिन रात करूँ
जब फूटे किरणे उजली
तेरी नाम से शरुआत करूँ

चलूँ हमेशा सत्य
के पथ पर
न विचारों का
अवसाद करूँ

कर्म धर्म धीर नीति
का निज मान करूँ
चलूँ उठाकर सर अपना
तिरंगे का सम्मान करूँ

भयमुक्त जीवन जीउँ
पवित्र मन से धयान करूँ
जो मिले सत्य मार्ग पर
भगवन तेरा हर काम करूँ

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे से
ना तेरी पहचान करूँ
देखूं जन जन में तुझको
ना भेदभाव भगवान करूँ

मिटाऊं हमेशां द्वेष कलेश
हर प्राणी से प्यार करूँ
जगदीश इतनी शक्ति देना
दुःख में भी शिष्टाचार करूँ

आनंद आये काँटों पर भी
आदत ऐसी तमाम करूँ
सहनशक्ति हो गहना मेरी
आदर्श चरित्रवांन बनूँ

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