कैसे ?

हाल– ऐ –िदल उन्हें बताऊँ कैसे ?
अपनी भावनाएँ उन्हें जताऊँ कैसे ?
बातें इतनी घड़े में भरा हो समुदर जैसे।
अधरों पर अटकी है गा कर उन्हें सुनाऊँ कैसे ?
कविताएँ एक मेरा माध्यम हैं बािरश के िलए बादल माध्यम हैं जैसे ।
ये बात उन्हें समझाऊँ कैसे?
लौक लाज सब पीछे छोड़कर चला आया आगे, अब वो भी तो बढ़ाएँ कदम अपने।
उनके िबना आगे बढ़ुँ अब मैं कैसे ?
कहीं ऐसा न हो की इसी उलझ – सुलझ में िदन बीत जाएँ उम्र कट जाए ।
इस मुश्िकल का ज्ञान उन्हें कराऊँ कैसे ?
कभी हंसते हैं कभी गुस्सा करते हैं कभी दुखी होते हैं पर उसी अंदाज़ से तो मेरा ये हाल है इस हाल ऐ िदल को उन्हें बताउँ कैसे ?
अपनी भावनाएं उन्हें जताऊँ कैसे ?

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