जब से मैं खुद ही को आजमाने लगा हूॅं

जब से मैं खुद ही को आजमाने लगा हूॅं
मैं तेरे ओर भी करीब आने लगा हूॅं
ऐ सनम तु आती हैं मेरे ख्वाबो मैं
क्या मैं भी तेरे ख्वांबो मे आने लगा हूॅं
जब मुझे देख तु भीगी जुल्फें छटकती
मैं भ्‍ाी बारिश का लुत्फे उठाने लगा हूॅं
जब से तू ख्वाुबो में आने जाने लगी
मैं भी गजल और कविता सुनाने लगा हूॅं
तु नहीं करती प्यातर मुझसे पता जब चला
तब से तुझे और ज्यादा चाहने लगा हूॅं
भूल जाऊॅं मैं तुझको ये मुमकिन नहीं हैं
तन्हाई में याद तुझे मैं आने लगा हूॅं

4 Comments

  1. mahendra gupta 08/05/2014
    • avinash kumar 09/05/2014
  2. Rinki Raut Rinki Raut 13/05/2014
    • avinash kumar 13/05/2014

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