तेरा दुलार याद आता है

कभी तुम्हारी हंसी,

कभी तेरा डांटना याद आता है।

आँखों में तुम्हारे नमीं,

माँ तेरा दुलार याद आता है।

लगती कभी चोट मुझको,

तू गले से मुझे लगाती।

छोड़ कर सारे काम को,

तू दौड़ी चली आती।

गई तुम दूर मुझसे अब जो,

याद है तुम्हारी सताती।

निहारूं तुम्हारी जब भी फोटो,

उसमें मुस्कान नज़र आती।

उस मुस्कान में मैं खो जाता,

तो तेरी सूरत ही नज़र आती।

याद में तुम्हारी मेरे, नयनों में जल भर आता,

हे माँ तुम्हारे न होने की, कमी नज़र आती।

हर पल हर छण,

तुम्हारी कमी सताती है।

हर पग हर डगर,

तुम्हारा एहसास दिलाती है।

नहीं दर्शाता मैं किसी को,

चेहरा तुम्हारा याद आता है।

शत-शत नमन मैं करूँ तुमको,

माँ तेरा दुलार याद आता है।