मेरी वफा का इजहार

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

मेरी वफा पे शक ना करना मुझें दीदार कर लेने दो

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

लगा ना देना पाओं पे बेड़ियाँ उन्हें शलाखों पे जीने की आदत नही

तुम कहों तो बदल जायेंगे जमाने में वफा का इजहार करने को

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

मुस्कुराहठ पे कापते है होठ़ तुम्हें खुसी जताने को जमाने भर में

तुम थोडा पास आकर रह जाओं हम बदल जायें इन होठों के दीदार को

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने

सीने में हाथ रख के देखो धड़कता रहा है ये दिल तुम्हारे लिये

अब थोडा पास आकर रह जाओं सभल जायें सायद आज हम

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

तुम्हारी राह अलग हो जाय अगर मेरी आँखें नम होकर भी निहारेगी

आज सुनकर मेरी वफा का प्याम लौटकर कहोगी इजहार करने को

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

जिंन्दगी फिर से शुरूवात हो जाय येसे कदम तुम चंद चल दो

चांदनी रात में जैसे बैताब है तारे चांदनी के दीदार को

आज तुम ना कहना मेरी वफा का इजहार करने को

मेरी वफा पे शक ना करना मुझें दीदार कर लेने दो ।

4 Comments

  1. Ravi shukla 12/05/2014
  2. kuldeep 26/06/2016
  3. ganesh dutt Ganesh 21/01/2018

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