शमा

शमा

परवाना कहे शमा से,

समेट कर अपनी बाँहों में ।

सिखा दो मुझे भी कुछ,

ज्ञान की बातें ।

मैं भी सीखूंगा,

औरों को भी सिखाऊंगा ।

क्या ज्ञान है इस ज्योति में,

ये सबको बताऊंगा ।

शमा कहे परवाने से,

जल जाएगा, झुलस जाएगा ।

मत आ मेरे नजदीक,

वरना दुनिया से उठ जाएगा ।

आसान नहीं है ज्ञान की बातें,

इसमें उलझ कर रह जाएगा ।

भक्ति की परिकाषठा है ये,

इसमें जीवन को भूल जाएगा ।

परवाना कहे शमा से,

इसे भूल जाना मंजूर है ।

तुम्हारे इस ज्ञान की ज्योति में,

मुझे उलझ जाना मंजूर है ।

ऐसा ज्ञान मिलता नहीं कहीं,

कई जीवन जी लिए ।

तुम्हारे इस ज्ञान की ज्योति में,

कई उदधार हो लिए ।

बस अब नहीं जाना कहीं ओर,

तुम ही हो मेरे जीवन की डोर ।

मृत्यु आए तो आए,

नहीं जाना तुम्हें छोड़ कर कहीं ओर ।

क्या प्रेम की परिकाष्ठा है,

जीवन भी जिसको मंजूर नहीं ।

खो जाना चाहता है ज्ञान में,

इसको मृत्यु का भी भय नहीं ।

ऐसी भक्ति दे भगवान,

वरना जीवन है बेकार ।

हर किसी को मिले ज्ञान,

ऐसा प्रभु देना वरदान ।

देवेश दीक्षित

9582932268

3 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 27/04/2014
  2. jagdish bhagwani jagdish bhagwani 28/04/2014
  3. ganesh dutt ganesh dutt 03/05/2014

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