क्योंकी मौका नहीं मिलता

जब बनती हैं पंक्तियाँ

तो कागज कलम नहीं मिलता

लिखना चाहता हूँ कविता

मगर मौका नहीं मिलता

तनहाइयों को समेटना चाहता हूँ

दिल से निकलती चंद पंक्तियों में

पर लिखने से रह जाता हूँ

क्योंकि मौका नहीं मिलता

तनहाई की सोचता हूँ

मगर तनहाई नहीं मिलती

चाह कर भी लिख नहीं पाता हूँ

क्योंकि मौका नहीं मिलता

तारों की चमक को

समेटना चाहता हूँ

ज्ञान कि माला में

पिरोना चाहता हूँ

ढूंढ़ता हूँ अँधेरे में उजाले को

ढूंढ़ता हूँ अपने में छिपी कविता को

मगर ढूंढ नहीं पाता हूँ

क्योंकि मौका नहीं मिलता

जब लिखना चाहता हूँ कविता

तो शब्द नहीं मिलते

जब शब्द मिलते हैं

तो मौका नहीं मिलता

देवेश दीक्षित

9582932268

4 Comments

  1. jagdish bhagwani jagdish bhagwani 28/04/2014
    • deveshdixit devesh dixit 29/04/2014
      • jagdish bhagwani jagdish bhagwani 30/04/2014
  2. deveshdixit devesh dixit 01/05/2014

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