तेरा साथ निभाऊंगा !!

ऐ अजनबी तू ही बता दिल मेरा तेरे साथ क्यों जा रहा !
इस ज़माने में मुझको तनहा छोड़कर कहाँ जा रहा !!
मैं तुझसे मोह्हबत की, मैं तुझसे इबादत की !
फिर भी तू मुझे उल्फत की राहों से मुह मोड़ रहा !!

मैं ना रहूँ तेरे बिन जाऊं तो जाऊं कंहाँ !
देखूं जिधर भी देखूं , बस पाऊँ तो पाऊँ तुझे वहां !!
रूह में तू मेरी इस कदर बस गया जैसे निशाँ ही निशाँ !
तू इज़ारत है मेरी , तू अमानत है मेरी !!
तुझ बिन रहूँ तो रहूँ कहाँ !!

मैं वापस आऊंगा और तेरी रूह में उत्तर जाऊँगा !
फिर ना जाने मैं तुमसे दूर नहीं हो पाऊंगा !!
मिले तो थे हम एक अजनबी बनकर !!
पर अब मैं पूरी जिंदगी तेरा साथ निभाऊंगा !!

Written By Shakti

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  1. Poem Network 28/06/2014

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