कांटे चुभती है लहू के बौछार होते है

कभी कभी जब हम उदास होते है
आँखों रोती है दिलों में कुछ बात होते है
एक हसीं दुनिया है ये या जालिमों का आशियाना
कोई डूब जाता है किसी को बचाने को और कोई डुबोकर कहता है उनके ऐसे ही काम होते है

सफ़र है ज़िन्दगी का काटों के पथ पर
कांटे चुभती है लहू के बौछार होते है

चादर में छिपी जिश्म ख़ुदा के नूर होते है
चादर हट गई अगर तो रूह सड़कों पे नीलाम होते है

समझ के कुछ नहीं कर सके तो नासमझ बन गए
लोगों की आह से बचे भी रहे, व् जिम्मेदारी रब के नाम होते है

ख़ुदगर्ज है वो लोग जो भागते है बस खुद के लिए ,भूल जाते है हम की
हर किसी का हाथ पकड़ने से रब की फेहरिस्त में खुद के नाम होते है

।।शिव कुमार सिंह।।

Leave a Reply