पीपल की छाहं

जानें कहाँ चला दिल,
खुले आसमान में ।

आना पड़ेगा एक दिन,
पतझड़ की ठाँव में ।

लगता नहीं अब दिल,
उजड़े बिरान में ।

मिलता जहां था दिल,
पीपल की छाँव में ॥

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  1. nitesh singh nitesh singh 12/04/2014

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