कब अइबू महरानी

कब अइबू हमरी बखरिया,
हे दुर्गा महरानी !
सब निर्धन के धन दे देहलू,
हमहूँ के दे दा तब जानी,
हे दुर्गा महरानी !
कब अइबू हमरी बखरिया,
हे दुर्गा महरानी !
सब अंधन के आँख दे देहलू,
हमहूँ के दे दा महरानी ।
हे दुर्गा महरानी !
कब अइबू हमरी बखरिया,
हे दुर्गा महरानी !
दब लंगड़न के पैर दे देहलू ,
हमहूँ के दे दा तब जानी ।
हे दुर्गा महरानी !
कब अइबू हमरी बखरिया,
हे दुर्गा महरानी ॥

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