मुसाफिर …

मुसाफिरों कि इस दुनिया में,क्या खोएगा क्या पाएगा ,
मुसाफिर बन आया था,मुसाफिर बन चला जाएगा .
मुसाफिर हुँ मैं , मुसाफिर है तू
जाने इस दुनिया के कैसे दस्तूर ,
बनेंगे कई रिश्ते जिंदगी के सफ़र में ,
पर आया था अकेला , अकेला ही रह जाएगा .
राह थक जाएँ मगर मुसाफिर कभी थकते नहीं ,
दिल के गागर भर जाएँ मगर साहिल कि प्यास बुझती नहीं .
खुदी को कर बुलंद जितना, खुद से कर इश्क़ उतना ,
अनजान सी कहानी है तू , पूरा जो कभी ना किया जायेगा .
युँ तो कई अरमान तेरे सजती होंगी दिलो में ,
पर कही सो न जाए तेरी मंज़िले , और खो न जाए तू राहो में .
रौशनी तो सिर्फ राह दिखलाती , जीना तो अँधेरा ही सिखलाएगा ,
कर मोहब्बत रात से वरना, अँधेरा कहीं रुठकर खो जाएगा .
मुसाफिरों कि इस दुनिया में क्या खोएगा क्या पाएगा ,
मुसाफिर बन आया था , मुसाफिर बन चला जाएगा .

नितेश सिंह(कुमार आदित्य )

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