भीगा मौसम….

अधूरे से तुम , अधरे से हम ,
पर है पूरा ये भीगा मौसम .
सुनते ना तुम , सुनते ना हम ,
पर अक्सर कुछ कहता ये भीगा मौसम .
शामो को मिला रंगो का साथ ,
पर हो गयी फिर कैसी ये रात ,
तन्हा से तुम , तन्हा से हम ,
पर है ना तनहा ये भीगा मौसम .
शमा कि रात ना बुझेगी अब ,
चिरागे इश्क़ ना जलेगी तब ,
नजरो को सुन , पलकों से तुम ,
पर कुछ है केहता ये भीगा मौसम .
बेहते ना तुम , बेहते ना हम,
पर अक्सर हैं बेहता ये भीगा मौसम.
आज भी राहे हैं मेरी गुमसुम,
पर अक्सर है चेहेकता ये भीगा मौसम .
अधूरे से तुम, अधूरे से हम,
पर हैं पूरा, ये भीगा मौसम.
nitesh singh(kumar aditya)

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