अँधेरे में उजाले की तलाश

अँधेरे में उजाले की तलाश“

 

अँधेरे में उजाले की

तलाश है मुझे

वीराने में बहारों की

तलाश है मुझे

मृत्यू में जीवन की

तलाश है मुझे

और क्या बताऊँ मैं

किस-किस की तलाश है मुझे

कहते हैं लोग मुझे

क्या तलासते हो

अँधेरे में उजाले को

क्यों पुकारते हो

कीचड में कमल को

क्यों तलाशते हो

आंसुओं की आँखों में

बहार क्यों लाते हो

शोचता हूँ मैं कभी की

क्या जवाब दूँ उन सवालों का

जिंदगी को तो खुद तलाश है मेरी

मैं क्या किसी की तलाश करूँगा

कैसी है ये अदभुत जिंदगी

ऐसी जिंदगी की तलाश है मुझे

शोचता हूँ कुछ लिखूं पर

शब्दों की तलाश है मुझे

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