निहारो मत चाँद को

निहारो मत चाँद को

निहारो मत चाँद को

वो शर्मा जाएगा

तारों ने घेर रखा है उसे

गुस्सा आ जाएगा

 

तपिस बहुत है तुममें तारों

कोई जल जाएगा

बादलों ने घेर रखा है तुम्हें

तू कुछ न कर पायेगा

 

चंदा की चांदनी उसके साथ हो

तो तेरा क्या रौब चल पायेगा

हवाओं ने रोका है तुम्हें

एक कदम भी न हिल पायेगा

 

पतझड़ का मौसम हो

और तू टिक पायेगा

न इतना अहम करो

आकाश से झड जाएगा

 

उधार की रौशनी का साथ हो

तेवर फिर भी दिखाएगा

जाओ चाँद से सीख कर आओ

वो तुम्हें सिखाएगा

 

उधार की रौशनी को

कैसे रखा जाएगा

शालीनता कैसे हो

इसका ज्ञान कराएगा

 

न चाँद से इर्षा करो

वो गले से तुम्हें लगाएगा

बस तपिस तुम कम करो

फिर न कोई जल पाएगा

 

निहार लो अब चाँद को

कोई कुछ न कह पाएगा

तारे भी अब शांत हैं

उनको न गुस्सा आएगा

 

 

देवेश दीक्षित

9582932268

One Response

  1. शिवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव 07/04/2014

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