जो बीत गई सो रात गई –

जो बीत गई सो रात गई I
जो बात हुई सो बात गई II
कुछ तूनें कही कुछ मैनें कही ,
आँखों ने कही कुछ दिल में रहीI
कहते कहते लवों पे अटकी ,
अनकही रही कुछ कही गई I
जो बात हुई सो बात गई I

प्रभा किरण उगने को है,
नव उमंग उठने को है I
नई सुबह है नव दिन होगा,
वक्त कहां रुकने को है I
कल की छोड़ें कल की सोचें,
कल को घड़ें सौगात नई I
जो बात हुई सो बात गई I

आओ मिल कर साथ चलें,
हाथों में लेकर हाथ चलें I
गिरते हुए को थामें मिलकर,
नव युग का निर्माण करें I
मन निर्मल तो मिले संबल,
कल को कहें कुछ बात नईI
जो बात हुई सो बात गईI

कभी उंगली तेरी न मेरी उठे,
कभी गर्दन मेरी न तेरी झुकेI
सब झांके अपने गिरेबानों में,
चलता पहिया कभी न रुकेI
अपनी छोड़ के सब की कहें ,
करें जनहित में करामात नईI
जो बात हुई सो बात गईI

मतभेद रहे मन भेद नहीं,
सत्य कहो कोई खेद नहींI
आईना हो एक सब के लिए,
हो खून किसी का सफेद नहींI
पतझड़ बीता अब आया बसंत,
आई खुशियों की बारात नईI
जो बीत गई सो रात गईI
जो बात हुई सो बात गईII

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