उषा की किरण

संकट का बादल हो हम काट निकल जाते ।
दुस्वारी हिन्दू मुस्लिम की हम साथ निगल जाते॥
माता अम्मी कह बच्चे सारे प्यार जताते ।
अंधियारा हटाकर नव गीत अमल लाते ॥
दौलत दुनियाँ लेकर भी सुहृद सुकर्म कराते।
मर्त्यभुवन के स्वर्ग धरा परोपकार सभी करते॥
नववर्ष नव सबेरा ले उषा की किरणें आती ।
चंचल चितवन नित नवीन नवस्वर गीत सुनातीं॥
रंगमहल के बसे मसखरे भी साधो-साधो गाते ।
खेती के खेतिहर खेतों में खुरपी ले खेत निराते ॥
मौनी आमावष्य मेला में माँएं मनहर गीत सुनाती।
मंगल लिए कामना हिय में अपने-अपने गृह जाती ॥

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