विकाश

हवा बही सीधी सुगन्ध ।
जन-मन विश्वास उमंग ॥
अधखिली कलियाँ खिसी !
ठंढ़ई मोहक सुगन्ध ॥
मनेगी ईद-होली ।
सुलझे मिनट चन्द ढ़ंग॥
मन मंगल ललकारा ?
विकाश देश का नारा ॥
सोमनाथ से चलकर आया ।
विश्वनाथ शिवशंकर धाम ॥
पुरी द्वारिका परमेश्वर पुनि ।
को शिवशंकर जी किया प्रणाम॥

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