जंग जहाँ में?

जहाँ भी देखो वहीं जंग जारी है ।
क्यों पिस रही सारी जनता हमारी है।।
लूट की दौलत फितरत जो तुम्हारी है।
जातियों में बटता देश की लाचारी है ॥
गर गुलामी की गजब दिल में खुमारी है।
तो यह सियासत में कैसी दीनदारी है ॥
आजाद अपना देश यह सब मानते हैं ?
रोटी के वास्ते लोग कफन बाँधते हैं ॥
आस्तीन में वह कौन कटार छुपाए है ।

सर जमी पर हरક્ષण लाखों शिरमुड़ाए हैं॥

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