हम सब भिखारी हैं –

कोई अस्त्र दिखा कर
कोई बल से डरा कर
कोई जाल में फंसा कर
इन्सान से कोई
कुच्छ माँगता है
कभी कुच्छ माँगता है
कभी मन मसोस कर
कोई हाथ जोड़ता है
भले ही कहे तुम सब के लिए
पर सपने हैं पाले खुद के लिए
लोगों से ऐसे
कोई वोट माँगता है
कोई देता दुहाई
ईमान के नाम पर
कोई आंचल फैला कर
भगवान के नाम पर
इन्सान से कोई
कुच्छ माँगता है
कभी कुच्छ माँगता है
कोई मन्दिर के अंदर
कोई मन्दिर के बाहर
गिड़गिड़ा कर कोई
मूक रह कर कोई
कोई मणके फेर कर
कोई मन को फेर कर
कोई धन माँगता है
कोई अन्न माँगता है
प्यार की भिक्षा कोई
स्वस्थ तन मन माँगता है
भगवान से कोई
कुच्छ माँगता है
कभी कुच्छ मांगता है
हम सब खिलाड़ी हैं
हैं अंदर से चतुर
पर दिखें अनाड़ी हैं
हम सब भिखारी हैं
बस अपने लिए
हम सब मांगते हैं
कोई इनसान से मांगता है
कोई भगबान से मांगता है
हम सब भिखारी हैं
बस अपने लिए
हम सब भिखारी हैं !