किन्नौर स्मृति -भाव चित्र-5 स्वर्ग सी सुन्दर वादियाँ हैं —

स्वर्ग सी सुंदर वादियाँ हैं,
यहाँ टोहते साहस पहाड़ I
किन्नर कैलाश की छाया में,
करे क़ुदरत जहां श्रृंगार I

बर्फ़ बृक्ष बागान कहीं,
झर झर झरते झरनेI
ठिठकें ठिठुरें ठंड से’कोचे’
दिन को देखें सपने I
निर्हर्द्यी पर संजीव चट्टानें,
कहें मूर्ख इन्हें उजाड़ I

सीढ़ी जैसे कंढ़े जिन पर ,
बाफ़रा ओगला रंग बिखेरें I
अखरोट बादाम खुमानी न्योजा,
ठंड में ठंडा दिल हिलोरें I
गंध बिखेरें केसर जीरा,
फल फूलों की बहार I

नाचे यौवन साथ साथ ,
ढन ढनाढन ढोल मधुर I
टन टनाटन ताल थाल ,
बाहें कटि दिल घूं घूं ऊपरI
सर सर करती पवन हांफती ,
याद दिलाती भूला जो इकरारI

फूलों प्रति कशिश तो देखो ,
फुलैच गाँव गाँव में सजती I
नाच गीत जीवन की शैली ,
दिल ‘कोचों’ का ठगती I
जहां प्रेयसी की याद सताए ,
तरुणाई मांगे बृद्ध उधार I

छांग मूहरी अर्क अंगूरी ,
मिलती जीवन रक्षक जड़ीबूटीI
खान पान की बात निराली ,
कोई मलता पीता शिवबूटी I
मनभावन रीति रिवाजों से ,
अतिथि का होता देव सत्कारI

शशी सितारों के प्रहर में ,
नव नभ का सीना चाके I
गिरी शिखरों के सहस्त्र चेहरे,
सर्पीली हिमसुता को झांकें I
कैसा प्रकृति का तिलिस्मी यौवन ,
घना घन घन से करते प्यार I

गड़कें हिमखण्ड प्रलयी नाद से,
चहूँ दिशाएं तब कांपें I
नत मस्तक कर बाँध किन्नर ,
उमापति को तब ध्याबेंI
मिनतें करें सभी देव गुर,
नहीं व्यापकता का पारावार I

क़ुदरत से भी लड़ने का ,
किन्नर साहस अदम्य रखते हैंI
निवारण फिर भी कई कष्टों का,
गुर ग्राम देवता करते हैं I
अदालत सजती है जब उनकी ,
तभी सबका होता है उद्धार I
स्वर्ग से सुंदर वादियां हैं,
यहाँ टोहते साहस पहाड़ I

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