कौन हूँ मैं ?

कौन हूँ मैं ? का प्रश्न कचोटता मेरे मन को है,
मस्तिष्क के विचारों की तेजना विद्गध करती तन को है,
आवश्यकता किसको है मेरी क्या? मटा के स्तन को है,
पिता को आवश्यकता क्या? क्या आवश्यकता बंधुजन को है?
क्यों? हुआ है जन्म मेरा, मैं अब तक ना समझ पाया,
गिरता-पड़ता-ठोकर खाता लावारिस बचपन पाया,
दहलीज जवानी की लांघी तो गुरुकुल में गुरु ने ठुकराया,
क्या अपराध किया था मैंने? क्यों सूतपुत्र मैं कहलाया?
सूर्य का तेज मुझमें, अभेध कवच-कुंडल पाया,
दाग लगे ना दमन पे अपने, अश्व-नदी में बहवाया,
क्या अपराध किया था मैंने? क्यों सूतपुत्र मैं कहलाया?
राधा-माता का दुग्ध-पान कर ये तप्त-हाल सा तन पाया,
तात अधिरथ ने उँगली पकड़, चलना मुझको सिखलाया,
प्राण न्योछावर कर दे मुझ पे, शोण सा अनुज पाया,
पर क्या अपराध किया था मैंने? क्यों सूतपुत्र मैं कहलाया?
अखाड़े में हुआ प्रताड़ित, स्वयंवर में पांचाली ने ठुकराया,
आज्ञा दी केशव तुमने मुझको, क्यों पात्र हंसी का बनवाया?
चीर हरण के वक्त भी तुमने, मेरी बुद्धि को भरमाया,
पर क्या अपराध किया था मैंने? क्यों सूतपुत्र मैं कहलाया?
कवच-कुंडल मांग कर मुझसे, देवेंद्र याचक कहलाया,
दान दिया फिर कवच का मैंने, दानवीर मैं कहलाया,
अर्ध्यदान करता नित और सूर्यशिष्य मैं कहलाया,
पर क्या अपराध किया था मैंने? क्यों सूतपुत्र मैं कहलाया?
ब्रह्मास्त्र की शिक्षा लेने गुरु परशुराम को बनवाया,
सदा सत्य भाषण का व्रत भी मेरा तुड़वाया,
आखेट के बहाने, गोवध भी मुझसे करवाया,
भूल से हुई इतने में, तुमने गुरु से श्राप दिलवाया,
श्रापदग्ध करवाके जीवन, असहाय मुझको बनवाया,
मेरे मुख से भरी सभा में पांचाली को कुलटा कहलाया,
अर्द्धरथी कहलाकर युद्ध में अपमानित भी करवाया,
हे केशव ! कहो, क्यों तुमने मुझको पार्थ से भिड़वाया?
हे माधव ! कहो, क्यों तुमने महाभारत ये करवाया?
हे गुडाकेश ! कहो, क्यों तुमने भाई से भाई को मरवाया?
हे कृष्ण ! कहो, क्यों मैं सूतपुत्र कहलाया?
मैं ही क्यों? पूछेगी तुमसे आने वाली पीढ़ियाँ,
पूछेगी तुमसे वासुदेव क्या कर्ण ने था अपराध किया?
सती की कोख से जन्म, सूर्य का जिसने तेज पाया,
कहो-कहो हे कृष्ण ! कहो, क्यों सूतपुत्र वो कहलाया?

Manoj Charan

Mob. 9414582964

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