आँखे भर आई

आज मुझे कागज़ कलम की जरुरत नहीं
क्योंकि तेरा नाम मैने दिल पर उकेर लिया
और आज फिर से मैने टूटे हुए
दिल के टुकड़ों को रिपेयर कर लिया
ये दो दिलों की चाहत ही तो थी
जो हमें नजदीक खिंच लाई
दूर चली गई है मेरी तन्हाई
तू जब मेरे पास आई
जब बिछड़ गई थी तू मुझसे
याद करके उन दिनों को
आज फिर से मेरी आँखे है भर आयी

Leave a Reply