ग़ज़ल-सराबों में पानी कोई क्या ढ़ूंढ़ता है —

सराबों में पानी कोई क्या ढूंढता है I
हो सौदाई सा कोई क्यों घूमता है II
अपनी आँखें आज भी भर आती हैं,
हाल उनका जो हम से कोई पूछता हैI
जिनके ख्वावों में साँसे चलती रहें ,
लग जाए उम्र मेरी कोई सोचता है I
दिल तो नाजुक है पर खिलोना नहीं,
तोड़ कर मोल कोई क्यों पूछता है II
ए! जमाने गिला तुम से क्यों न करूं,
दर-दरीचे भी मेरे न कोई झांकता है I
‘कंवर’ होते हैं लोग उनपे निसार ,
दर्द औरों के खुद जो कोई भोगता है I
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2 Comments

  1. laique ahmad ansari laique ahmad ansari 25/03/2014
    • कंवर करतार 'खंदेह्ड़वी' 25/03/2014

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