ग़ज़ल-सज संवर अंजुमन में वे अगर जाएंगे —

सज संवर अंजुमन में वे अगर जाएंगे I
नूर परियों के चेहरे तो उतर जाएंगेII
जो थमा देंगे लहरों को दामन कभी,
गहरे सागर में वो भी उतर जाएंगे I
मेंरे दिल में मुहब्बत का तूफां जो है,
उनकी नफ़रत के शर बे-असर जाएंगे I
लाख पहरे भी हों तो होते रहें,
हम तो परबाने हैं बे-फ़िक्र जाएंगे I
जां अपनी तो है बस उन्हीं पे निसार,
‘कंवर’जिधर भी कहें हम उधर जाएंगेI

***-***-***

Leave a Reply