कवि ब्रह्मदेव शर्मा की रचना

सजे हुए हैं सारे उपवन तरह-तरह के फूलों से।
तथा सुरक्षा दे डाली है प्रभु ने उनको शूलों से।।
इसी तरह से इस जीवन में सुख-दुख फूल-शूल से हैं।
खुश रहना फूलों सा हँसना डिगना नहीं उसूलों से।।
|| कवि: ब्रह्मदेव शर्मा ||

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