हाथ जोड़कर सबके आगे —-।

हाथ जोड़कर सबके आगे बोल रहे हैं नेता जी।
एक दूसरे की पोलों को खोल रहे हैं नेता जी।।
प्रेम-मोहब्बत से जीवन को जीने के हम सब आदी।
जाने क्यों विष शुद्ध हवा में घोल रहे हैं नेता जी।।
|| कवि : ब्रह्मदेव शर्मा ||

2 Comments

  1. ब्रह्मदेव शर्मा 20/03/2014
    • KOMAL PRASAD SAHU 21/03/2014

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